स्वामी विवेकानंद की जीवन कथा|Swami Vivekanand Biography in Hindi

0

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सब आशा करती हूं आप ठीक होंगे। आज के इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं स्वामी विवेकानंद जी के बारे में,स्वामी विवेकानन्द बायोग्राफी, स्वामी विवेकानन्द जी की जीवन कहानी।

स्वामी विवेकानंद जी के बारे में हर कोई जानता है और आज हम आज के इस पोस्ट में स्वामी विवेकानंद जी की biography के बारे में जानेंगे।

उसी के साथ स्वामी विवेकानंद जी के सुविचार और उनकी लिखी हुई कुछ पंक्तियों पर ध्यान देंगे |आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के बारे में और स्वामी विवेकानंद क्यों आदर्श है कई महान हस्तियों के? आज की हमारी इस पोस्ट को आप अंत तक जरूर पढ़ना आपको बहुत सारी जानकारी मिलेगी।

Swami Vivekanand Biography in Hindi

सन 1881 की बात है जब एक professor ने उनके student को प्रश्न पूछा कि यह धरती यह आकाश और यह ब्रह्मांड क्या यह सब भगवान ने बनाया है? तब उस स्टूडेंट ने कहा यह भगवान की ही रचना है। प्रोफेसर ने दुबारा से प्रश्न पूछा तो फिर यह शैतान किसने बनाया है? क्या शैतान को भी भगवान ने बनाया है? तब उस student ने कोई भी जवाब नहीं दिया और professor से एक प्रश्न पूछने की अनुमति मांगी।

Professor ने प्रश्न पूछने की अनुमति दे दी तो student ने प्रश्न किया कि क्या ठंड का कोई वजूद है ? तो professor ने कहा हां है… क्यों तुम्हें ठंड का एहसास नहीं हो रहा? तो student ने उनके professor से कहा कि क्षमा करें मगर आपका उत्तर गलत है, क्योंकि ठंड केवल उष्ण की अनुपस्थिति का एहसास है ठंड का कोई भी खुद का अस्तित्व ही नहीं है।

cold is the complete absence of heat

Swami Vivekananda

student ने दोबारा अपने professor को एक प्रश्न किया कि अंधकार का कोई अस्तित्व है? तो प्रोफ़ेसर ने कहा कि हां अंधकार या अंधेरे का कोई अस्तित्व है। तो professor का हां है क्योंकि रात होने पर अंधेरा ही तो होता है। पर student ने फिर से कहा, मैं माफी चाहता हूं मगर आपका उत्तर इस बार भी गलत है, क्योंकि अंधकार जैसी कोई भी चीज का खुद का कोई भी अस्तित्व ही नहीं है, अंधकार दरअसल प्रकाश की अनुपस्थिति है।

Darkness is actually the absence of light

Swami Vivekananda

हम हमेशा प्रकाश और ऊष्मा के बारे में पढ़ते हैं, कभी ठंड या अंधेरे के बारे में नहीं। तो ठीक उसी प्रकार शैतान का कोई अस्तित्व नहीं है, असल में शैतान प्यार, विश्वास और ईश्वर की आस्था में अनुपस्थिति का एहसास है, शैतान का खुद का कोई भी अस्तित्व नहीं है।

Evil is actually the absence of love faith and true believe in God

Swami Vivekananda

वह छात्रा कोई और नहीं बल्कि स्वामी विवेकानंद जीत है तो आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद जी के बारे में जिन्होंने भारतीय संस्कृति को पूरे विश्व स्थर मैं पहचान दिलाई। तो आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के बारे में और उनके बताए गए अनमोल वचनों के बारे में।

Life of Swami Vivekananda, Swami Vivekananda Biography in Hindi

स्वामी विवेकानंद जी का पूरा नाम नरेंद्र नाथ विश्वनाथ दत्त था। इनका जन्म पश्चिम बंगाल कोलकाता में एक कुली उदार परिवार में हुआ उनके नो भाई बहन थे। इनके पिता विश्वनाथ दत्त कोलकाता Highcourt में Atorny General थे जो वकालत करते थे। विवेकानंद की माता भुनेश्वरी देवी सरल एवं धार्मिक विचारों वाली महिला थी। स्वामी विवेकानंद के दादा दुर्गादत्त संस्कृत और फारसी के विद्वान थे, जिन्होंने 25 वर्ष की उम्र में ही अपना परिवार और घर त्याग कर सन्यासी जीवन स्वीकारा था।

नरेंद्र बचपन से ही शरारती और कुशाग्र बुद्धि के बालक थे, उनके माता-पिता को कई बार उन्हें संभालने और समझाने में बहुत परेशानी होती थी। बचपन में उन्हें वेद, उपनिषद भगवत गीता, रामायण महाभारत और वेदांत अपनी माता से सुनने का शौक था और योग और कुश्ती में विशेष रुचि थी। स्वामी विवेकानंद 1879 में Presidency Collage की enterance परीक्षा में first Division में आने वाले प्रथम विद्यार्थी बने। उन्होंने पश्चिमी जीवन और यूरोपीय इतिहास की पढ़ाई General Assembly Institute से की।

1881 में उन्होंने ललित कला की परीक्षा पास की और 1884 में स्नातक की डिग्री पूरी की। नरेंद्र डेविड ह्यूम, केवल कैंट और चार्ल्स डार्विन जैसे महान वैज्ञानिकों और दर्शन शास्त्रियों के काम का अध्ययन कर रखा था। स्वामी विवेकानंद हरबर्ट स्पेंसर के विकास सिद्धांत से प्रभावित थे, और उन्हीं के जैसा बनना चाहते थे। उन्होंने स्पेंसर की किताब को बंगाली में परिभाषित किया है, General Assembly संस्था के अध्यक्ष William Hassly ने लिखा था कि नरेंद्र सच में बहुत होशियार है, मैंने कई यात्राएं की, बहुत दूर तक गया, लेकिन मैं और जर्मन विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र के सभी विद्यार्थी कभी भी नरेंद्र के दिमाग और कुशलता के आगे नहीं जा सके।

वेस्टर्न कल्चर में विश्वास रखने वाले उनके पिता विश्वनाथ दत्त अपने पुत्र को अंग्रेजी शिक्षा देकर भयंकर में रंगना चाहते थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। नरेंद्र के पिता की 1884 में अचानक मृत्यु हो गई और परिवार दिवालिया हो गया। साहू कार दिए हुए कर्जे को वापस करने की मांग कर रहे थे। और उनके रिश्तेदारों ने भी उनके पूर्वजों के घर से उनके अधिकारों को हटा दिया था । उसी दौर में नरेंद्र कोई काम ढूंढने में लग गए और भगवान के अस्तित्व का प्रश्न उनके सामने खड़ा हुआ, जहां रामकृष्ण परमहंस के पास तसल्ली मिली और उन्होंने दक्षिणेश्वर जाने का मन बना लिया।

1885 में रामकृष्ण को गले का कैंसर हो गया और नरेंद्र और उनके अन्य साथियों ने रामकृष्ण के अंतिम दिनों में उनकी सेवा की। रामकृष्ण ने अपने अंतिम दिनों में उन्हें सिखाया कि मनुष्य की सेवा करना ही भगवान की सबसे बड़ी पूजा है। रामकृष्ण ने नरेंद्र को अपने मठ वासियों का ध्यान रखने को कहा और अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। 1886 में रामकृष्ण परमहंस का निधन हो गया। सन 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म परिषद का आयोजन किया गया, जहां पर स्वामी विवेकानंद ने एक ऐतिहासिक भाषण दिया

विवेकानंद के शुरुआती संबोधन सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका कहते वहां उपस्थित विश्व के 6000 विद्वानों ने लगातार करीब 2 मिनट तक तालियां बजाई। अगले दिन के सभी अखबारों ने घोषणा की कि विवेकानंद का भाषण सबसे सफल भाषण था। जिसके बाद सारा अमेरिका विवेकानंद और भारतीय संस्कृति को जानने लगा इससे पहले अमेरिका पर इस तरह का प्रभाव किसी हिंदू ने नहीं डाला था। विवेकानंद 2 साल तक अमेरिका में रहे इन 2 सालों में उन्होंने हिंदू धर्म का विश्व बंधुत्व का संदेश वहां के लोगों तक पहुंचाया।

अमेरिका के बाद स्वामी विवेकानंद इंग्लैंड गए, वहां की मार्केट नोबेल उनकी फॉलोअर बनी जो बाद में सिस्टर निवेदिता के नाम से प्रसिद्ध हुई। 1896 में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, दुनिया के सभी धर्म सत्य है और एक ही धैय के जाने की तरफ जाने के अलग-अलग रास्ते रामकृष्ण मिशन की शिक्षा थी। 4 जुलाई 1910 को स्वामी विवेकानंद ने महासमाधि लेकर अपने जीवन का त्याग किया जिसकी भविष्यवाणी उन्होंने पहले ही कर दी थी कि वह 40 साल से ज्यादा नहीं जिएंगे। अपनी मृत्यु के पहले स्वामी विवेकानंद ने पैदल ही संपूर्ण भारत भ्रमण किया और एक सन्यासी जीवन जिया।

swami vivekananda quotes

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये।

Arise, awake and do not stop until the goal is reached.

– स्वामी विवेकानंद

खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप हैं।

The greatest sin is to think yourself weak.

– स्वामी विवेकानंद

तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना हैं। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही हैं।

You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.

– स्वामी विवेकानंद

सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।

Truth can be stated in a thousand different ways, yet each one can be true.

– स्वामी विवेकानंद

बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप हैं।

External nature is only internal nature writ large.

– स्वामी विवेकानंद

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार हैं।

All the powers in the universe are already ours. It is we who have put our hands before our eyes and cry that it is dark.

– स्वामी विवेकानंद

एक विशाल व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।

The world is the great gymnasium where we come to make ourselves strong.

– स्वामी विवेकानंद

दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।

In a conflict between the heart and the brain, follow your heart.

– स्वामी विवेकानंद

शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु हैं। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु हैं। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु हैं।

Strength is Life, Weakness is Death. Expansion is Life, Contraction is Death. Love is Life, Hatred is Death.

– स्वामी विवेकानंद

किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये – आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

In a day, when you don’t come across any problems – you can be sure that you are travelling in a wrong path.

– स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद के सुविचार Swami Vivekananda Thoughts in Hindi

एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

“जब तक जीना, तब तक सीखना” – अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक हैं।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पर विश्वास नहीं कर सकते।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जो अग्नि हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है, यह अग्नि का दोष नहीं हैं।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो। सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

हम जो बोते हैं वो काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हैं।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो–उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

सत्य की ज्योति ‘बुद्धिमान’ मनुष्यों के लिए यदि अत्यधिक मात्रा में प्रखर प्रतीत होती है, और उन्हें बहा ले जाती है, तो ले जाने दो; वे जितना शीघ्र बह जाएँ उतना अच्छा ही हैं।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढ़ाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।

– स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)

अगर विवेकानंद चाहते तो अपनी पूरी जिंदगी अमेरिका और यूरोप के किस शहर में ऐश और आराम के साथ बिता सकते थे, लेकिन उन्होंने अपनी आत्मकथा में कहा है कि मैं एक सन्यासी हूं ऐसो आराम के साथ बिता सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी आत्मकथा में कहा है कि “मैं एक सन्यासी हूं, हे भारत देश! तुम्हारी सारी कमजोरियों के बावजूद, मैं तुम्हें बहुत प्रेम करता हूं…।”

स्वामी विवेकानंद के जन्म दिन 12 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रभावित होकर कई महान हस्तियों जैसे निकोला टेस्ला और नरेंद्र मोदी ने विवेकानंद की जीवन शैली को अपनाया और एक सन्यासी की तरह जीवन जिया। एक इंसान जिसने सारे संसार के बंधनों को तोड़कर स्वयं को बंधन मुक्त किया जिसका एक ही प्रेम था उसका देश।

उठो! जागो….!! और तब तक रुको नहीं जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए।

Last Words

यह थी आज के पोस्ट पर स्वामी विवकानन्द की जीवन कथा और स्वामी विवेकानंद जी की सुविचार । आशा है आपको Swami Vivekanand Biography in Hindi पढ़कर अच्छा लगा।

आपको आज का यह article केसा लगा? और कोई सवाल है तो निचे comment जरूर करे। इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे, इस जानकारी को share करने के लिए article के शुरुवात में और अंत में share button पर click करें। Knowledge finder blog के latest updates/ notification पाने के लिए Bell Icon दबाएं । हमसे facebook पर जुड़ने के लिए हमारे Facebook page को like करें।

“हर बार की तरह आपका कीमती समय देकर हमारे आज के इस post को इतने प्यार से पढ़ने के लिए और knowledge Finder blog पर visit करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद”।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here